तमन्ना किसकी नही होती
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की
छोड़कर सारी दुनिया पीछे हमेशा आगे आने की.
सूरज की तरह निकल प्रातः सर्वत्र प्रकाश फैलाने की
फूलों की खुशबु की तरह हर बाग को महकाने की
चिड़ियों की तरह बैठ डाल पर कुछ चहचहाने की
नदियों की तरह बहकर कुछ दूरी तय कर जाने की
सब खुश है और उनको और खुश कर जाने की
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जानेकी ।
जैसे बछड़ा करे प्रतीक्षा अपने मां के आने की
जैसे बच्चा जिद करता है अपने घर को जाने की
जैसे बाहर करे प्रतीक्षा मछली जल को पाने की
जैसे मरणासन्न करे आशा पुनः जीवन को पाने की
बस वैसे ही मेरी आशा जीवन में मर मिट जाने की
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की।
लक्ष्य है अब जरूरत है बस दृष्टि जमाने की
पूरी ताकत के साथ बस उसी में जुट जाने की
घबराना नही ये दोस्त इन मुश्किलें को देखकर
ये तो पुरानी आदत है दुनिया की तुम्हें आजमाने की
बस जिद है मन में अब ऐसा कुछ कर जाने की
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की।
06/11/2008
जयपुर
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