Friday, August 9, 2024

सब अच्छा है.....

सागर जो ऊपर से दिखता स्थिर और अचल है।
 अंदर जा कर देखो तो हलचल ही हलचल है।
मानव मन की छाया का प्रतिबिंब और क्या होगा। 
बाहर कहते सब अच्छा है अंदर उथल-पुथल है।

- संभव निराला

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