माननीय प्राचार्य महोदय श्री अजीतसिंह के विदाई के अवसर पर समर्पित एक कविता
सपने देखना उनको जीना और कैसे उनको सच करना है
प्रकृति से विभिन्न रंगों को चुनकर कैसे उनमें रंग भरना है
अध्ययन अध्यापन विद्यालय व्यवस्था शिक्षक से तालमेल बिठाकर
हर कार्य से हमने देखा कि कैसे विद्यालय को सर्वोत्तम करना है II1II
मृदुल मुस्कान, शर्ट हाफ है परंतु जोश में हमेशा फुल रहना है
जो मन में है बस वो कहना है कैसे सबका मन हरना है
मिलो कभी भी उनसे मिलकर सदा तुम्हें यह महसूस ही होगा
कुछ आदर्शों को लेकर के कैसे सच्चा सरल रहना है II2II
विद्यालय में कोई कार्य हो या फिर कोई प्रतियोगिता करना हो
कोई नया विचार लेकर के कक्षा की और हमें चलना हो
छोटी-बड़ी सभी समस्याओं का समाधान पाकर हमने देखा है
आप के सानिध्य में आकर के विद्यालय को कैसे समृद्ध करना है II3II
आप यहां से जा रहे हैं क्योंकि जाना प्रकृति का नियम है
वहां खुशी है जहां आप जाएंगे, यहां थोड़ी मायूसी और गम है
आपके कार्य व्यक्तित्व आपका नाम आपका यहीं रहेगा
कैसे जा पाएंगे आप यहां से आपको सदा यहीं रहना है II4II
अच्छे कार्यों की समृद्ध विरासत छोड़ आप जो जा रहे हैं
उसको हम सदा बढ़ाएंगे यह विश्वास दिला रहे हैं
स्वस्थ प्रसन्नचित्त दीर्घायु हो जहां आपको अब रहना हो
वैसे जीवन पर्यंत आपको हम सब के
दिल में रहना है II5II
No comments:
Post a Comment