Thursday, August 8, 2024

विदाई समारोह कविता

 माननीय प्राचार्य महोदय श्री अजीतसिंह के विदाई के अवसर पर समर्पित एक कविता


सपने देखना उनको जीना और कैसे उनको सच करना है 

प्रकृति से विभिन्न रंगों को चुनकर कैसे उनमें रंग भरना है 

अध्ययन अध्यापन विद्यालय व्यवस्था शिक्षक से तालमेल बिठाकर 

हर कार्य से हमने देखा कि कैसे विद्यालय को सर्वोत्तम करना है II1II


मृदुल मुस्कान, शर्ट हाफ है परंतु जोश में हमेशा फुल रहना है 

जो मन में है बस वो कहना है कैसे सबका मन हरना है

 मिलो कभी भी उनसे मिलकर सदा तुम्हें यह महसूस ही होगा 

कुछ आदर्शों को लेकर के कैसे सच्चा सरल रहना है II2II


विद्यालय में कोई कार्य हो या फिर कोई प्रतियोगिता करना हो

 कोई नया विचार लेकर के कक्षा की और हमें चलना हो 

छोटी-बड़ी सभी समस्याओं का समाधान पाकर हमने देखा है

 आप के सानिध्य में आकर के विद्यालय को कैसे समृद्ध करना है II3II


 आप यहां से जा रहे हैं क्योंकि जाना प्रकृति का नियम है

 वहां खुशी है जहां आप जाएंगे, यहां थोड़ी मायूसी और गम है

 आपके कार्य व्यक्तित्व आपका नाम आपका यहीं रहेगा

 कैसे जा पाएंगे आप यहां से आपको सदा यहीं रहना है II4II


अच्छे कार्यों की समृद्ध विरासत छोड़ आप जो जा रहे हैं 

उसको हम सदा बढ़ाएंगे यह विश्वास दिला रहे हैं 

स्वस्थ प्रसन्नचित्त दीर्घायु हो जहां आपको अब रहना हो 

वैसे जीवन पर्यंत आपको हम सब के

 दिल में रहना है II5II

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