पटना प्रस्थान...
गांव की रंग ओ बहार को देखा
इंसानी आंखों में प्यार को देखा।।
भीषण गर्मी और तपन के बाद,
वर्षा की पहली बौछार को देखा।।
बहुत दिनों बाद मिले मित्रों की
गालियों में छुपे प्यार को देखा।।
बीत गए दिन जल्दी-जल्दी
फिर आने के इंतजार को देखा।।
आंखें नम थी पर कुछ बोल न पायी
तब अनजाने इकरार को देखा।।
खुशनसीबी है आशीर्वाद जिनका,
मां-पिता के असीम दुलार को देखा।।
गमगीन थे दोस्त,घर,गांव,गलियां
जाते हुए जब इस यार को देखा।।
पटना प्रस्थान.....
18.06.2024
संभव जैन 'निराला'
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