असावधान न होना मित्रवर!,खतरा अभी टला नहीं है।।
सम्मुख बैठा प्रबल शत्रु है, समझो साक्षात् ही मृत्यु है
सारी दुनिया ही बेवश है वश किसी का यहां चला नहीं है
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।
बिना मास्क के घूमने वालों,बिना हाथ धोए वस्तु छूने वालों
यूं महामारी फैलाने से ,होता किसी का भला नहीं है
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।।
दो गज देह की दूरी रखना, संक्रमण से तुम बचते रहना
जीवन जीने की अब बोलो, क्या ये अच्छी कला नहीं है।
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।।
अच्छी नींद सुबह व्यायाम, लेना सात्त्विक भोजन पानी
रहना हमेशा ही तंदुरुस्त क्योंकि जीवन अभी ढला नहीं है।
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।।
बच्चे बूढ़े घर पर रहना, बहुत जरूरी हो तब घर से निकलना
नियमों के पालन से हमको,क्या नया जन्म मिला नहीं है ।
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।।
संकल्पों की ताकत समझो ,संकल्पों से सब 'संभव' है
दृढ़ संकल्पों के आगे ..क्या पर्वत कोई हिला नहीं है।।
..........मित्रवर! खतरा अभी टला नहीं है।।
संभव जैन निराला
प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक ,संस्कृत
केन्द्रीय विद्यालय क्र 1 सागर म प्र
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