महिला के हर उस रूप को, आज मेरा शत-शत नमन है।।
सृष्टि के आदि से ही, लोगों ने तुमको कुछ ना समझा
ज्ञान यज्ञ व्यापारादि से, सदा तुम को दूर रखा
तब ज्ञान की ज्योति जला कर फैलाया प्रकाश जो गहन है
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।
धीरे-धीरे खुद के अधिकारों को तुमने लड़ना सीखा
सारी सृष्टि को बतलाया स्त्री बिन है जगत अधूरा
आपके संघर्ष अधिकारों से पुष्पित यह चमन है
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।
भ्रूण हत्या लैगिंक असमानता, और अशिक्षा सह कुपोषण
कभी दहेज की भेंट चढ़ कर परिवार कलह में जीवन अर्पण
ओ समाज के सभ्य पुरुषों, क्या कष्ट करता कोई इतने सहन है
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।
आज तुम आगे बढ़ो, और सदा बढ़ती रहो
जो आए कोई मुश्किल तो, सामना डटकर करो
ले हिम्मत इन बाजुओं में, आज चलने का चलन है
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।
और कुछ नहीं चाहिए बस सोच में सुधार आए
आप की उपलब्धियों के, गीत यह सारा जग गावे
देखना फिर चारों ओर फैली खुशहाली और अमन है
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।
संभव जैन 'निराला'
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
8, मार्च 2021, सागर 12:40
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