Tuesday, October 29, 2024

निज अंतर दीप जलाएंगे हम दीपावली मनाएंगे....

इस दिवाली के पावन पर्व पर
कुछ अतुलित सुख को पायेगें
करके सफाई कलुषित भावों की
निज अन्तर दीप जलायेगें
श्री महावीर का निर्वाण महोत्सव
है राम राज्य का पुनः आगमन
इससे अच्छा सुअवसर अब
और सुकाल कहां से पायेगें
निज अंतर दीप जलायेगें ।।

जो है बाहर की सुन्दरता
वो क्षणिक मोहती लोगों को
कर देती है व्यर्थ हमेशा
अपने ही उपयोगों को
पर परिणति से हटा दृष्टि को
निज शुद्धात्म लक्ष्य ही पायेगें
निज अन्तर दीप जलायेगें ।।

होंगे कुछ मूरख ऐसे भी
जो इस पृथ्वी की ना सोचेगें
मेहनत से कमाये इन पैसों से
कुछ जहरीले पटाखे फोडेंगे
होगी विषाक्त हवा देखो
सर्वत्र कचरा ही पायेगे
कुछ क्षण के घातक आनन्द के लिए
सोचो ! प्रकृति को कितना नुकसान पहुँचायेगें
कर लो प्रण अब तुम आज अभी
पशुओं को ना नुकसान पहुँचायेगें कभी
हर भूखे तक भोजन पहुँचे
हर घर में सुख का उजाला हो
उन बेसहारा लोगों के
कोई आंसू पोछनें वाला हो
है दीपावली सार्थक तभी
जब हर घर जगमग पायेगें
निज अंतर दीप जलायेगें !!
निज अंतर दीप जलायेगें !!
- संभव जैन 'निराला'
दीपावली की शुभकामनाएँ

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