Thursday, October 31, 2024

मुश्किलों से भरी जिंदगी को क्यों मैं सौगात कहता हूं

सूनापन है साथ मेरे, फिर भी अकेला रहता हूं 
करता हूं बातें खुद से ही और चुपचाप रहता हूं।
मेरे दोस्त आते हैं मुझसे मिलने मगर बाहर से ही 
अब तक उनसे नही मिला जिनके मैं साथ रहता हूं
 अजब सी उलझन अब मन में लिए बैठा हूं 
क्यों उन्ही कामों में उलझा हूं जिनसे मैं बचता रहता हूं ।
कुछ भी तो नही ले जाऊंगा, मैं साथ अपने ।
फिर ये कौन सा हिसाब है जो मैं दिन रात करता हूं।।
 कभी 'संभव' होगा तो पूछूंगा खुद से ही 
कि मुश्किलों से भरी जिंदगी को क्यों मैं सौगात कहता हूं

सोमवार, 07:50 PM 21-09-2020

- संभव जैन निराला

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