मेरी स्वरचित कविता-
हिन्दी मेरा निज गौरव है
हिन्दी मेरी शान
हिन्दी में सब जीवन जीते
वही मेरी पहचान ।।
हिन्दी में ही फल फूल रहा है
सदियों से साहित्य सदन
गीत कहानी उपन्यास से
सुरभित है सारा उपवन।।
यही वही भाषा है जिसने
हम सबको था जोड़ दिया
आजादी की उस लड़ाई में
सबको अपनी ओर किया ।।
कवि लेखकों ने मिलकर के
अदभुत विपुल साहित्य रचा
एक एक रचना मोती सी
जिसमें जीवन सार बसा ।।
एक बात हमेशा दिल में
ये अहसास दिलाती थी
कि राष्ट्र हमारा भारत है
और भाषा हिन्दी कहलाती थी।।
लाखों भाषा सीखो जीवन में
पर हिन्दी का ना तिरस्कार करो
बहुत बड़ी प्यारी भाषा है
हिन्दी का सत्कार करो।।
हिन्दी मेरा निज गौरव है
हिन्दी मेरी शान
हिन्दी में सब जीवन जीते
वही मेरी पहचान ।।
हिन्दी में ही फल फूल रहा है
सदियों से साहित्य सदन
गीत कहानी उपन्यास से
सुरभित है सारा उपवन।।
यही वही भाषा है जिसने
हम सबको था जोड़ दिया
आजादी की उस लड़ाई में
सबको अपनी ओर किया ।।
कवि लेखकों ने मिलकर के
अदभुत विपुल साहित्य रचा
एक एक रचना मोती सी
जिसमें जीवन सार बसा ।।
एक बात हमेशा दिल में
ये अहसास दिलाती थी
कि राष्ट्र हमारा भारत है
और भाषा हिन्दी कहलाती थी।।
लाखों भाषा सीखो जीवन में
पर हिन्दी का ना तिरस्कार करो
बहुत बड़ी प्यारी भाषा है
हिन्दी का सत्कार करो।।
हिन्दी के लिए समर्पित मेरा छोटा सा प्रयास
बधाई संभव जी ब्लॉग लेखन के लिए। सुंदर कविता :)
ReplyDeleteबधाई संभव जी ब्लॉग लेखन के लिए। सुंदर कविता :)
ReplyDeleteधन्यवाद अंकुर भाई कभी कभी आपका सहयोग भी नितांत आवश्यक होगा ,सहयोग कीजिएगा
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