Thursday, October 31, 2024

तू चलता जा.......

है आग जब तक सीने में, तू जलता जा
राह कैसी भी हो मुश्किल, तू चलता जा....
वक्त नहीं रुकता किसी के इन्तजार में
है वक्त जब तक तू वक्त के साथ चलता जा ||

मत सोच कि राह में कांटे बहुत होंगे
मत सोच कि अब के दांव में घाटे बहुत होंगे
अब कदम दर कदम तू संभलता जा 
दृष्टि जमा अब लक्ष्य पर और चलता जा.. || 

घर के बंधन भी अकेले में तड़पाते होंगे 
कभी ये नैना भी उसी की याद में आंसू बरसाते होंगे
 इन आंसुओ की ढाल में भले तू ढलता जा 
पर मत कर खुद को कमजोर, आगे तू चलता जा..||

 कभी डगमगाते होंगे पग भविष्य की चिंता में 
कभी बीती यादों में ये मन रमता होगा 
डरना रमना तो होगा, जब होना होगा 
अभी वर्तमान की बातों में तू चलता जा..|| 

है आग जब तक सीने में, तू जलता जा 
राह कैसी भी हो मुश्किल, तू चलता जा....||

मुश्किलों से भरी जिंदगी को क्यों मैं सौगात कहता हूं

सूनापन है साथ मेरे, फिर भी अकेला रहता हूं 
करता हूं बातें खुद से ही और चुपचाप रहता हूं।
मेरे दोस्त आते हैं मुझसे मिलने मगर बाहर से ही 
अब तक उनसे नही मिला जिनके मैं साथ रहता हूं
 अजब सी उलझन अब मन में लिए बैठा हूं 
क्यों उन्ही कामों में उलझा हूं जिनसे मैं बचता रहता हूं ।
कुछ भी तो नही ले जाऊंगा, मैं साथ अपने ।
फिर ये कौन सा हिसाब है जो मैं दिन रात करता हूं।।
 कभी 'संभव' होगा तो पूछूंगा खुद से ही 
कि मुश्किलों से भरी जिंदगी को क्यों मैं सौगात कहता हूं

सोमवार, 07:50 PM 21-09-2020

- संभव जैन निराला

अभिव्यक्ति से मत घबराओ

अभिव्यक्ति से मत घबराओ 
दिल में जो है सबको बताओ ।। 
क्या हुआ जो हार गये कुछ 
जीत की फिर से तमन्ना जगाओ।। 
खाली हाथ नहीं बैठा करते पंथी 
उठो, चलो, एक नई राह बनाओ। 
हरेक हार में कुछ जीत छुपी है 
जीत का सबको हुनर सिखाओ।। 
खेलों बच्चों संग बैठ बड़ों संग 
खुद भी सीखो उन्हें सिखाओ ।। 
जीवन सहज सरल होता है 
खुद जी कर सबको बतलाओ। 
कहता 'संभव' सब मित्रों से 
अपना जीवन सर्वोच्च बनाओ।।


Tuesday, October 29, 2024

निज अंतर दीप जलाएंगे हम दीपावली मनाएंगे....

इस दिवाली के पावन पर्व पर
कुछ अतुलित सुख को पायेगें
करके सफाई कलुषित भावों की
निज अन्तर दीप जलायेगें
श्री महावीर का निर्वाण महोत्सव
है राम राज्य का पुनः आगमन
इससे अच्छा सुअवसर अब
और सुकाल कहां से पायेगें
निज अंतर दीप जलायेगें ।।

जो है बाहर की सुन्दरता
वो क्षणिक मोहती लोगों को
कर देती है व्यर्थ हमेशा
अपने ही उपयोगों को
पर परिणति से हटा दृष्टि को
निज शुद्धात्म लक्ष्य ही पायेगें
निज अन्तर दीप जलायेगें ।।

होंगे कुछ मूरख ऐसे भी
जो इस पृथ्वी की ना सोचेगें
मेहनत से कमाये इन पैसों से
कुछ जहरीले पटाखे फोडेंगे
होगी विषाक्त हवा देखो
सर्वत्र कचरा ही पायेगे
कुछ क्षण के घातक आनन्द के लिए
सोचो ! प्रकृति को कितना नुकसान पहुँचायेगें
कर लो प्रण अब तुम आज अभी
पशुओं को ना नुकसान पहुँचायेगें कभी
हर भूखे तक भोजन पहुँचे
हर घर में सुख का उजाला हो
उन बेसहारा लोगों के
कोई आंसू पोछनें वाला हो
है दीपावली सार्थक तभी
जब हर घर जगमग पायेगें
निज अंतर दीप जलायेगें !!
निज अंतर दीप जलायेगें !!
- संभव जैन 'निराला'
दीपावली की शुभकामनाएँ

हिन्दी का सम्मान करो....

मेरी स्वरचित कविता-
हिन्दी मेरा निज गौरव है
हिन्दी मेरी शान
हिन्दी में सब जीवन जीते
वही मेरी पहचान ।।
हिन्दी में ही फल फूल रहा है
सदियों से साहित्य सदन
गीत कहानी उपन्यास से
सुरभित है सारा उपवन।।
यही वही भाषा है जिसने
हम सबको था जोड़ दिया
आजादी की उस लड़ाई में
सबको अपनी ओर किया ।।
कवि लेखकों ने मिलकर के
अदभुत विपुल साहित्य रचा
एक एक रचना मोती सी
जिसमें जीवन सार बसा ।।
एक बात हमेशा दिल में
ये अहसास दिलाती थी
कि राष्ट्र हमारा भारत है
और भाषा हिन्दी कहलाती थी।।
लाखों भाषा सीखो जीवन में
पर हिन्दी का ना तिरस्कार करो
बहुत बड़ी प्यारी भाषा है
हिन्दी का सत्कार करो।।
हिन्दी के लिए समर्पित मेरा छोटा सा प्रयास

Monday, October 28, 2024

महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत शत नमन है

सृष्टि को जो जन्म देती करती, अनेकों कष्ट सहन है
 महिला के हर उस रूप को, आज मेरा शत-शत नमन है।।

सृष्टि के आदि से ही, लोगों ने तुमको कुछ ना समझा
 ज्ञान यज्ञ व्यापारादि से, सदा तुम को दूर रखा 
तब ज्ञान की ज्योति जला कर फैलाया प्रकाश जो गहन है
 महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।

धीरे-धीरे खुद के अधिकारों को तुमने लड़ना सीखा
 सारी सृष्टि को बतलाया स्त्री बिन है जगत अधूरा
 आपके संघर्ष अधिकारों से पुष्पित यह चमन है
 महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।

भ्रूण हत्या लैगिंक असमानता, और अशिक्षा सह कुपोषण
 कभी दहेज की भेंट चढ़ कर परिवार कलह में जीवन अर्पण
 ओ समाज के सभ्य पुरुषों, क्या कष्ट करता कोई इतने सहन है
 महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।

आज तुम आगे बढ़ो, और सदा बढ़ती रहो 
जो आए कोई मुश्किल तो, सामना डटकर करो 
ले हिम्मत इन बाजुओं में, आज चलने का चलन है
 महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।

और कुछ नहीं चाहिए बस सोच में सुधार आए 
आप की उपलब्धियों के, गीत यह सारा जग गावे
 देखना फिर चारों ओर फैली खुशहाली और अमन है 
महिला के हर उस रूप को आज मेरा शत-शत नमन है।।

संभव जैन 'निराला' 
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
 8, मार्च 2021, सागर 12:40

Sunday, October 20, 2024

माली का मन उतर गया रे.....

कविता - माली का मन उतर गया रे.....

कितनी उम्मीदें पाली थी रे उसने अपने उपवन से
 माली का मन उतर गया रे इस प्यारे से गुलशन से!

उसने सींचा खून पसीना स्वजीवन के कण कण से
 उसने सेवा भी कर डाली अपने तन मन और धन से
 हमने यह क्या कर डाला रे जो हार गया वो इस क्षण से 
माली का मन उतर गया रे इस प्यारे से गुलशन से।

टुकड़े-टुकु‌ड़े विखर गये तो फिर कब हम मिल पायेगें।
 'आय लुटेरा लुटेगा क्या फिर भी हम मौज मनायेगें
 अरे सोच लो क्या लेकर जाना है इस जीवन से
 माली का मन उतर गया रे इस प्यारे से गुलशन से।।

देखों अपनी ताकत को और अभी यहीं पहचान लो
 नही तुम्हारें जो हितकारी उसे अभी से जान लो
 हम सब एक रहेगें सदा ही कह दो अपने इस मन से
 माली का मन उतर गया रे इस प्यारे से गुलशन से।

28/09/2008
कोटा

तमन्ना किसकी नहीं होती.....


तमन्ना किसकी नही होती

तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की
 छोड़कर सारी दुनिया पीछे हमेशा आगे आने की.

सूरज की तरह निकल प्रातः सर्वत्र प्रकाश फैलाने की 
फूलों की खुशबु की तरह हर बाग को महकाने की
 चिड़ियों की तरह बैठ डाल पर कुछ चहचहाने की
 नदियों की तरह बहकर कुछ दूरी तय कर जाने की
 सब खुश है और उनको और खुश कर जाने की
 तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जानेकी ।

जैसे बछड़ा करे प्रतीक्षा अपने मां के आने की
 जैसे बच्चा जिद करता है अपने घर को जाने की
 जैसे बाहर करे प्रतीक्षा मछली जल को पाने की
 जैसे मरणासन्न करे आशा पुनः जीवन को पाने की
 बस वैसे ही मेरी आशा जीवन में मर मिट जाने की
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की।

 लक्ष्य है अब जरूरत है बस दृष्टि जमाने की 
पूरी ताकत के साथ बस उसी में जुट जाने की
 घबराना नही ये दोस्त इन मुश्किलें को देखकर 
ये तो पुरानी आदत है दुनिया की तुम्हें आजमाने की
बस जिद है मन में अब ऐसा कुछ कर जाने की
तमन्ना किसकी नही होती हर दिल पर छा जाने की।

06/11/2008

जयपुर