प्रशिक्षित स्नातकोत्तर शिक्षक (हिन्दी) केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1 कंकड़बाग (द्वितीय पाली) पटना बिहार
Friday, August 9, 2024
सब अच्छा है.....
असावधान न होना मित्रवर (कोरोना काल)
कल उन्ही हाथों में होती निश्चित सफलता है...
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना………
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना………
नववस्त्र धारण कर प्रातः, जिनदेव दर्शन मंदिर को जाना।
देव शास्त्र गुरु सह सभी बड़े जनों का,जीवन में आशीष पाना।
भव अभाव का लक्ष्य लेकर, स्वाध्याय में नित मन रमाना।
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा, जन्मदिन ऐसे मनाना।।1।।
मां से कहना केक की जगह आप मुझको हलुआ बनाना।
काजू बादाम किशमिश घी संग बहुत सारा प्यार मिलाना।।
बड़े ही आदर विनय पूर्वक सबको खिलाना,खुद भी खाना।
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना।।2।।
मोमबत्तियों की जगह पर अब ज्ञान का दीपक जलाना।
व्यर्थ दिखावे के लिए ही ना अनमोल जीवन खोते जाना।।
बस जरूरी और सार्थक चीजों को उपयोग लाना ।
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना।।3।।
कोशिश करना अपने कार्य में, कोशिश से ना कभी दिल चुराना।
ईमानदारी मेहनत लगन को सदैव अपने साथ पाना।
खुद हमेशा खुश ही रहना, दूसरों में खुशियां फैलाना।
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना।।4।।
मुश्किलें जब आएं तो उनसे ना तुम कभी घबराना।
संपत्ति और विपत्ति में समता भाव धारण करते जाना।
लक्ष्य को एकाग्र कर ये बहुमूल्य जीवन सफल बनाना।।
मेरे प्रिय बेटे तुम हमेशा जन्मदिन ऐसे मनाना।।5।।
प्रिय बेटे समृद्ध को चतुर्थ जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं
दिनांक 29.01.2024 सोमवार,पटना, बिहार
पटना प्रस्थान...
पटना प्रस्थान...
गांव की रंग ओ बहार को देखा
इंसानी आंखों में प्यार को देखा।।
भीषण गर्मी और तपन के बाद,
वर्षा की पहली बौछार को देखा।।
बहुत दिनों बाद मिले मित्रों की
गालियों में छुपे प्यार को देखा।।
बीत गए दिन जल्दी-जल्दी
फिर आने के इंतजार को देखा।।
आंखें नम थी पर कुछ बोल न पायी
तब अनजाने इकरार को देखा।।
खुशनसीबी है आशीर्वाद जिनका,
मां-पिता के असीम दुलार को देखा।।
गमगीन थे दोस्त,घर,गांव,गलियां
जाते हुए जब इस यार को देखा।।
पटना प्रस्थान.....
18.06.2024
संभव जैन 'निराला'
महिला दिवस समारोह
एक नई शुरुआत करें हम
तुम कुछ नहीं कर सकती जीवन में, बस एक घर से दूजे घर जाना है
झाड़ू पोंछा बर्तन बच्चे, बस इसमें जीवन बिताना है
पाल रखे जो ऐसे पूर्वाग्रह ,आओ उन पर कुठाराघात करें हम
आज महिला सम्मान दिवस पर ,एक नई शुरुआत करें हम।।१।।
सोच बड़ी ताकत है प्यारे, जीवन दशा बदल देती है
सामाजिक परिवर्तन लाने को, थोड़ा-थोड़ा बल देती है
सारा जीवन तुम बिन अधूरा, आओ इसी पर बात करें हम
आज महिला सम्मान दिवस पर, एक नई शुरुआत करें हम।।२।।
सृष्टि के हर एक प्राणी में, तुम ही तो जीवन देती हो
अपनी त्याग तपस्या से ही, जीवन में खुशियां भर देती हो
कष्टों में जो बीता जीवन, आओ वहां नया प्रभात करें हम
आज महिला सम्मान दिवस पर, एक नई शुरुआत करें हम ।।३।।
भाव बहुत हैं पर शब्दों में ,सब कह पाना मुश्किल सा है
पर बात वहां तक पहुंच गई है ,मन अब बिल्कुल हल्का सा है
जो अच्छा है उसको अच्छा कहने में विश्वास करें हम
आज महिला सम्मान दिवस पर, एक नई शुरुआत करें हम ।।४।।
मैं अपने कृतज्ञ वचनों से, आभार आपका जता रहा हूं
है अनेकों उपकार आपके, मैं तो बस कुछ बता रहा हूं
दुनिया की सबसे सुंदर कृति से, नवरचना की बात करें हम
आज महिला सम्मान दिवस पर, एक नई शुरुआत करें हम।।५।।
संभव जैन ‘निराला’
Thursday, August 8, 2024
विदाई समारोह कविता
माननीय प्राचार्य महोदय श्री अजीतसिंह के विदाई के अवसर पर समर्पित एक कविता
सपने देखना उनको जीना और कैसे उनको सच करना है
प्रकृति से विभिन्न रंगों को चुनकर कैसे उनमें रंग भरना है
अध्ययन अध्यापन विद्यालय व्यवस्था शिक्षक से तालमेल बिठाकर
हर कार्य से हमने देखा कि कैसे विद्यालय को सर्वोत्तम करना है II1II
मृदुल मुस्कान, शर्ट हाफ है परंतु जोश में हमेशा फुल रहना है
जो मन में है बस वो कहना है कैसे सबका मन हरना है
मिलो कभी भी उनसे मिलकर सदा तुम्हें यह महसूस ही होगा
कुछ आदर्शों को लेकर के कैसे सच्चा सरल रहना है II2II
विद्यालय में कोई कार्य हो या फिर कोई प्रतियोगिता करना हो
कोई नया विचार लेकर के कक्षा की और हमें चलना हो
छोटी-बड़ी सभी समस्याओं का समाधान पाकर हमने देखा है
आप के सानिध्य में आकर के विद्यालय को कैसे समृद्ध करना है II3II
आप यहां से जा रहे हैं क्योंकि जाना प्रकृति का नियम है
वहां खुशी है जहां आप जाएंगे, यहां थोड़ी मायूसी और गम है
आपके कार्य व्यक्तित्व आपका नाम आपका यहीं रहेगा
कैसे जा पाएंगे आप यहां से आपको सदा यहीं रहना है II4II
अच्छे कार्यों की समृद्ध विरासत छोड़ आप जो जा रहे हैं
उसको हम सदा बढ़ाएंगे यह विश्वास दिला रहे हैं
स्वस्थ प्रसन्नचित्त दीर्घायु हो जहां आपको अब रहना हो
वैसे जीवन पर्यंत आपको हम सब के
दिल में रहना है II5II
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माननीय प्राचार्य महोदय श्री अजीतसिंह के विदाई के अवसर पर समर्पित एक कविता सपने देखना उनको जीना और कैसे उनको सच करना है प्रकृति से विभिन्न ...